कारगिल युद्ध की शाैर्यगाथा पढ़ेंगे 9वीं के विद्यार्थी, सामाजिक विज्ञान में अध्याय जोड़ा...हिंदी-अंग्रेजी दोनों में माध्यम में होगा
1999 में हुए भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध काे 21 साल पूरे हो गए है। कारगिल विजय दिवस पर कई आयोजन भी हो चुके हैं। जिनमें शहीदों काे श्रद्धांजलि देकर विजय का उत्सव मनाया जाता है। भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस से भरे इस युद्ध की दास्तां काे प्रदेश के विद्यार्थियाें की किताबों तक पहुंचने में 21 साल का वक्त लग गया। अब इस युद्ध के बारे में अब प्रदेश के 9वीं कक्षा के विद्यार्थी भी पढ़ेंगे।
2019 में राज्य सरकार की ओर से गठित पाठ्यक्रम समीक्षा समिति ने कारगिल युद्ध की दास्तां और इसमें राजस्थान के जांबाज सैनिकों के साहस से संबंधित चैप्टर काे 9वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की किताब में जाेड़ा है। विद्यार्थियाें में भारतीय सेना के साहस और सेना के प्रति जुनून भरने के लिए जोड़े गए इस अध्याय काे अंग्रेजी और हिंदी दाेनाें ही माध्यम से शामिल किया है। इसमें कारगिल के अलावा पाकिस्तान से हुए सभी महत्वपूर्ण युद्धों का वर्णन है।
मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी राधेश्याम शर्मा ने बताया कि कारगिल युद्ध की वीर गाथा काे स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया है। इस साल कक्षा 9 के विद्यार्थी सामाजिक विज्ञान मेंं कारगिल योद्धाओं की वीरगाथा पढ़ेंगे। उल्लेखनीय है कि 26 जुलाई 1999 काे भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना काे कारगिल की ऊंची और दुर्गम पहाड़ियों पर रौंदकर जीत का परचम फहराया था।
इसके बाद बाद से हर साल 26 जुलाई काे विजय दिवस के रूप में कारगिल की जीत के साथ ही इस युद्ध में शहीद हुए जांबाजों काे याद किया जाता है। इस युद्ध की दास्तां सहित अन्य युद्धों की जानकारी कक्षा 9वीं की किताब में शामिल की है।
वीरता चक्र हासिल करने वालाें के नाम शामिल : किताब में कारगिल युद्ध में शहीद 52 सैनिकों का जिक्र नहीं है। हालांकि एक अध्याय में कई युद्धों काे शामिल किया है। 1948 से 1999 तक हुए युद्धों में विभिन्न वीरता चक्र हासिल करने वालाें के नाम जरूर शामिल है।
पांच गोली लगने के बाद भी 48 पाकिस्तानी सैनिकों को मारने वाले दिगेंद्र कुमार की शौर्यगाथा शामिल
किताब में सीकर जिले के निवासी नायक दिगेंद्र कुमार की शौर्यगाथा काे भी शामिल किया है। पाठ के विशेष रूप में दिगेंद्र की फाेटाे के साथ उनके बलिदान के बारे में लिखा है। सीकर जिले के दिगेंद्र कुमार ने इस युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए पांच गोलियां लगने के बाद भी 48 पाकिस्तानी सैनिकों काे मार गिराया था।
उन्होंने पाकिस्तानी सेना के मेजर अनवर का सिर काट कर तिरंगा फहराया था। युद्ध के बाद उन्हें महावीर चक्र प्रदान किया गया। पाठ्यक्रम समीक्षा समिति ने राष्ट्रीय सुरक्षा और शौर्य परंपरा नाम से अध्याय किताब में जाेड़ा। हिंदी के अलावा अंग्रेजी माध्यम की किताब में भी उसे स्थान दिया।
इस किताब में कारगिल युद्ध की शुरुआात और सैनिकों के साहस का वर्णन किया है। हिंदी में इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और शौर्य परंपरा नाम से प्रकाशित किया। जबकि अंग्रेजी माध्यम में इसे नेशनल सिक्यूरिटी एंड हीरोइक ट्रेडिशन नाम से प्रकाशित किया है।
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source https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/bhilwara/news/9th-students-will-read-the-story-of-kargil-war-127563036.html
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